Azadi ka mahatva essay | आजादी के महत्व की कहानी हिंदी

 

आजादी के महत्व की कहानी हिंदी


Azadi ka mahatva essay in hindi 

 आजादी के महत्व की कहानी हिंदी 



भारत को आजाद हुए 75 साल हो चुके हैं। आजादी के दीवानों की कहानियां आज देश का बच्चा बच्चा जानता है। आजादी के इन वीर योद्धाओं में दीवानों की तरह मंजिल पा लेने का हौसला तो था, लेकिन बर्बादियों का खौफ न था। अपने हौसलों से हर मुश्किल का सीना चीरते हुए आजादी की मंजिल की तरफ बढ़ते ही चले गये।


 "न हिसाब है, न कीमत है उनकी कुर्बानियों की, सँभालकर रख सकें उनके जिगर के टुकड़े आजादी को, यही कीमत हो सकती है उनकी मेहरबानियों की।" 


बात कुछ महीनों पहले की है। कोरोना महामारी के कारण पूरे देश मे एक बार फिर से लॉकडाउन लगा दिया गया था। रमेश और गीता दोनों भाई बहन का विद्यालय जाना एक बार फिर से बंद हो गया था। दोनों का ही चेहरा उतरा हुआ था। पिछले साल की तरह कहीं यह साल भी खराब ना जाए। क्योंकि दूसरे बच्चों की तरह वे अपनी पढ़ाई ऑनलाइन नहीं कर पाए थे। घर की आर्थिक स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी। माँ और पिता जैसे तैसे मजदूरी करके बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्चा चलाते थे। 

परन्तु महामारी के कारण उन्हें पिछले वर्ष से ही काम मिलने में परेशानी हो रही थी। धीरे धीरे हालात कुछ ऐसे बन गए कि रमेश और गीता को भी मजदूरी कर घर खर्च में मदद करनी पड़ गयी। घर के हालात कुछ हद तक सुधरे। स्वतन्त्रता दिवस के कुछ दिन पूर्व ही विद्यालय खोला गया। सभी बच्चे घरवालों की सहमति से विद्यालय जाने लगे।

 रमेश गीता को भी बुलाया गया। परन्तु उनको विद्यालय जाकर पढ़ने से अधिक जरूरी दो वक्त की रोटी कमाना लगा। रमेश की टीचर ने घर आकर रमेश को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा - रमेश कम से कम 15 अगस्त के दिन तो तुम आ ही सकते हो। क्या इस वर्ष आजादी का उत्सव नहीं मनाओगे? 

रमेश ने उत्तर दिया- मैडम जी.. किस बात की आजादी.. जब देश की आम जनता इतनी गरीब और लाचार है.. इस आजाद देश में आज हम बच्चों के हाथ मे किताबों के स्थान पर मजदूरी क्यों है? मैडम की आंखों में आंसू आ गए। मैडम को असली आजादी का मतलब समझ आ चुका था। आज भले ही देश आजाद है। परन्तु देश के अधिकतर नागरिक आज भी गरीबी और लाचारी के गुलाम हैं। 

मैडम ने तुरंत विद्यालय जाकर विद्यालय की कमेटी से बात की। रमेश और गीता की पढ़ाई मुफ्त कर दी गयी और उनके माता-पिता को कमेटी की तरफ से अच्छे रोजगार प्रदान किये गए। जिससे भविष्य में उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। स्वतन्त्रता दिवस का दिन आया। रमेश और गीता तिरंगे झंडे हाथों में लिए देशभक्ति के गानों पर दोस्तों संग झूम रहे थे। मैडम दोनों को निहार रही थी। 

मैडम को आजादी का जश्न मनाते हुए इतनी खुशी पहले कभी नहीं हुई थी, जितनी आज हो रही थी। हम आजाद हुए, कितना कुछ बदल गया, खुली हवा में साँस तो ले सकते हैं, जहाँ चाहे जा सकते हैं, कम से कम अपने मौलिक अधिकारों के अधिकारी तो हैं, मुँह से एक शब्द निकालना गुनाह तो नहीं है। अच्छा है हम आजाद हैं, उससे भी अच्छा होगा यदि हम दूसरों को आजाद कर सकें-गरीबी, भ्रष्टाचार, अज्ञानता और अंधविश्वास की गुलामी से। देश को जरूरत है उनकी जो दूसरों की मदद को आगे आएं। 

दूसरों के जीवन में भी सुधार लाने का प्रयास करें। आखिर छोटे-छोटे प्रयासों के दम पर ही तो बड़ी सफलताएं मिलती हैं। हम बदलेंगे देश बदलेगा। आजादी एक दिन में नहीं मिली, शताब्दियां लग गयीं, इन बातों को भी समझने में वक्त लगेगा। पर हां एक ना एक दिन लोग समझेंगे जरूर-"आजादी का महत्व।" 



 THANK YOU SO MUCH 

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