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Showing posts from April, 2020

Speech On Azadi Ka Amrit Mahotsav in Hindi 2022

  Speech On Azadi Ka Amrit Mahotsav in Hindi 2022 आदरणीय प्रधानाध्यापिका जी, अध्यापकगण और मेरे प्यारे साथियों आप सभी को मेरा शुभप्रभात और इस आजादी का अमृत महोत्सव की बहुत-बहुत सारी शुभकामनाएँ। मेरा नाम तनिषा मिश्रा है और मैं नवीं कक्षा में पढ़ती हूँ। आज मैं आपके समक्ष इस शुभ अवसर पर एक छोटा-सा भाषण प्रस्तुत कर रही हूँ। 15 अगस्त 2022 को हमारे भारत देश की आजादी के 75 साल पूरे हो जाएंगे। आजादी की 75वीं वर्षगाँठ को भारत सरकार आजादी का अमृत महोत्सव के तौर पर मना रहा है। इस महोत्सव को मनाने का निर्णय माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 12 मार्च 2021 को लिया गया था, यह कार्यक्रम 15 अगस्त 2023 भारत के 78वें स्वतंत्रता दिवस तक चलेगा। इस महोत्सव का आगाज गुजरात के साबरमती आश्रम से किया गया। इस उत्सव में जन-जन की भागीदारी है। अमृत महोत्सव का मतलब नए विचारों का अमृत, नए संकल्पों का । अमृत और आत्मनिर्भरता का अमृत है। इस महोत्सव से भारत अपने स्वतंत्रता सेनानी, अपनी संस्कृति, अपनी गौरवशाली प्रतिभा और उपलब्धियों का जश्न मना रहा है। इसको मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वतंत्रता सेनानियों

Why do We Celebrate Ramnavami

रामनवमी मनाने के पीछे क्या है इतिहास हिन्दू धर्म में रामनवमी का विशेष महत्व है । कहा जाता है कि इस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था । रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति होती है । इस दिन मां दुर्गा और भगवान राम की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है ।  तो चलिए जानते हैं रामनवमी पर्व का पौराणिक महत्व है,  रामनवमी का त्यौहार बेहद ही खास होता है क्योंकि इस दिन धरती से पाप का अंत करणी और आदर्श राज्य की परिकल्पना को सच में बदलने के लिए भगवान श्रीराम ने छिन लिया था ।  इस दिन की महिमा इतनी खासे कि अगर रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम का स्मरण और विधिविधान से पूजा पाठ की जाए तो सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं ।  पौराणिक कथा हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में धरती से अत्याचारों को खत्म करने और धर्म की फिर से स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने मृत्युलोक में श्रीराम के रूप में अवतार लिया । भगवान राम का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र में और कर्क लग्न में अयोध्या में राजा दशरथ के घर हुआ ।  उनकी माता का नाम कौशल्या था ।  भगवान र