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दयालुता स्वयं के प्रति, दूसरो के प्रति या पर्यावरण के प्रति पर निबंध

 

दयालुता स्वयं के प्रति, दूसरो के प्रति या पर्यावरण के प्रति पर निबंध




दयालुता स्वयं के प्रति, दूसरो के प्रति या पर्यावरण के प्रति पर निबंध




प्रस्तावना-

 किसी ने ठीक ही कहा ! "यदि आप कम से कम एक बार दया दिखाते हैं तो कभी भी आपका दिन बुरा नही जाएगा" दूसरों के प्रति दयालु और करुणामय होने से बहुत खुशी होती है। लेने की बजाए दूसरों को देने की खुशी पटुत अधिक है। 

जिन लोगों में दयालुता का गुण होता है, वें इस दुनिया में सबसे अटै व्यक्ति होते हैं। दयालता किसी व्यक्ति के जीवन में सफलता के स्तर को तय करने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाती है। 

दया एक दुर्लभ फूल की तरह , जिसकी खनाल अत्यंत सावधानी के साथ करनी चाहिए । इसके लिए प्रेम और समर्पण की आवश्यकता होती है। दयालुता का अर्थ यह हो सकता है कि बदले में अच्छे चीजों की अपेक्षा किए बिना अच्छी चीजें करना । 

स्वयं के प्रति :- 

सबसे पहले हमें स्वंय से शुरल करना चाहिए। स्वंय के प्रति सहानुभूति रखना व खुद का सम्मान करना जीवन भर के लिए खुशिया खरीद लेने जैसा है। हम खुद ही अपने सबसे अच्छे भाभी है। हमें खुद से प्रेम करना चाहिए • खुद से पैम' करने हम ज्यादा संतुष्ट रहते है और इससे हर काम के प्रति हमारी उत्सुकता बनी रहती है। और लगातार सकारात्मक विचार आते हैं। खुद के प्रति सहानुभूति रखने को दया भाव से ओंड लिया जाता है, जो गलत है। खुद के प्रति सहानुभूति रखते हुए म दूसरों के दुखों के बारे में भी सोचते है, जबकि खुद के प्रति दयाभाव रखते है, तो केवल खुद के बारे में ही सोच पाते हैं।

 दूसरों के प्रति :-

 दूसरों के प्रति दया करने से हमारे शरीर और भन' को कई अनगिनत लाम मिलते है । दूसरों के पति करणा दिखाने से उनका मूड अच्छा होता है और उनका दिन रोशन होता है। दयालुता हमारे लिए एक आशीर्वाद समान है । इसरों के पति दया दिखाने का मतपब जरूरी नही कि उनके लिए कुछ बडा करना । यह विनम् धेने और या किसी की भावनात्मक समर्थन दिने के रूप में होटे से रोगदान के रूप में भी ये सकता है। दयालुता के किसी तरह के कृत्यों में ज्यादा मेहनत नही लगती है लिकिन दूसरे व्यक्ति के जीवन में इससे एक बड़ा अंतर उत्पन  हो सकता  है।

 पर्यावरण के प्रति:- 

 हमें केवल भनुष्य के प्रति दया नही रखनी चाहिर' बल्कि प्रकृति के घटक के प्रति श्री दया रखनी चाहिए | जानवरों , पक्षियों और पेड-पौधों को श्री दया की भाषा आसानी से समझ आती हैं। उनके साथ र्भशा अच्छे व्यवहार से पेंश आना चाहिए। क्योंकि घर पर पर्यावरण एक प्रमुख कारक निभाता है 

निष्कर्ष- 

 दया महान गुण है और सभी को इसे प्राप्त करना पाहिए। हालाकि , कुछ लोग आपकी से लामान्वित ? सकते हैं और आपको विभिन्न तरीको से गुमराह कर सकते हैं। हमारे आस- पास के लोगों पर कृपा बरसाना हममे से हर एक का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए ।

 दया का सुनहरी नीर है, 
जिससे समान एक साथ बंद्या हुआ है!



THANK YOU SO MUCH 




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