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Sri Ramakrishna Paramahansa जीवन परिचय



रामकृष्ण परमहंस

Sri Ramakrishna Paramahansa जीवन परिचय 


रामकृष्ण परमहंस भारत के बहुत प्रसिद्ध संत में से एक हैं । स्वामी विवेकानंदजी इनके विचारों से प्रेरित थे इसी कारण विवेकानंद जी ने इन्हें अपना गुरु माना और इनके विचारों को गति प्रदान करने के लिए रामकृष्ण मठ की स्थापना की जो कि बेलूर मठ के द्वारा संचालित है । 

रामकृष्ण मठ और मिशन नामक ये संस्था जन मानुष के कल्याण के लिए एवं उनके आध्यात्मिक विकास के लिए दुनिया भर में काम करती है ।



तो आइए दोस्तो आज हम अपने ब्लॉग essayonfest.online में रामकृष्ण परमहंस के जीवन परिचय के बारे में बात करते हैं। रामकृष्ण जयंती कब मनाई जाती है ।

 हिन्दू कैलेंडर के अनुसार रामकृष्ण जयंती फाल्गुन द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष विक्रम संवत १८९२ में जब श्री राम कृष्ण का जन्म हुआ था को प्रति वर्ष मनाई जाती है । इस प्रकार इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार ये राम कृष्ण जयंती फरवरी अथवा मार्च में मनायी जाती है । इस साल 2020 में ये जयंती 25 फरवरी दिन मंगलवार को मनाई जाएगी ।


रामकृष्ण परमहंस का जीवन परिचय व इतिहास ।



रामकृष्ण परमहंस जी एक महान विचारक थे जिनके विचारों को स्वयं विवेकानंद जी ने पूरे दुनिया में फैलाया । रामकृष्ण जी ने सभी धर्मों को एक बताया । उनका मानना था सभी धर्मों का आधार प्रेम न्याय और परहितही है । उन्होंने एकता का प्रचार किया । रामकृष्ण जी का जन्म 18 फरवरी सन् 18 सौ छत्तीस में हुआ था । 



बाल्यकाल में इन्हें लोग गदाधर के नाम से जानते थे । ये एक ब्राह्मण परिवार से भी इनका परिवार बहुत करीब था लेकिन इनमें आस्था सद्भावना एवं धर्म के प्रति अपार श्रद्धा एवं प्रेम था । रामकृष्ण परमहंस जी देवी काली के प्रचंड भक्त थे ।



उन्होंने अपने आप को देवी काली को समर्पित कर दिया था । रामकृष्ण परमहंस जी के विचारों पर उनके पिता की छाया थी । उनके पिता धर्मपरायण सरल स्वभाव के व्यक्ति थे । 

यही सारे गुण राम किशन जी में भी व्याप्त थे । उन्होंने परम होम्स की उपाधि प्राप्त की और मनुष्य जाति को आध्यात्म का ज्ञान दिया । इन्होंने सभी धर्मों को एक बताया । इनके विचारों से कई लोग प्रेरित हुए जिन्होंने आगे चलकर इनका नाम और अधिक बढ़ाया । 




रामकृष्ण जी को गले का रोग हो जाने के कारण इन्होंने 15 अगस्त 1886 को अपने शरीर को छोड़ दिया और मृत्यु को प्राप्त हुए । इनके अनमोल वचनों ने कई महान व्यक्तियों को जन्म दिया । इनका असली नाम है गदाधर इनका जन्म 18 फरवरी 1836 को हुआ था । इनके मृत्यु 15 अगस्त 1886 को इनके पिता जी का नाम है खुदीराम । इनकी पत्नी का नाम है शारदा मणि ।


Ramakrishna Paramahansa


इनके करम संत उपदेशक



इनका कर्म स्थान है कलकत्ता इनके शिष्य थे स्वामी विवेकानंदजी इनकी अनुयायी हैं । केशवचंद्र सेन विजय कृष्ण गोस्वामी ईश्वर चंद्र विद्यासागर बंकिम चंद्र चटर्जी अश्विनी कुमार दत्त । अब इनके विवाह एवं ईश्वर भक्ति के बारे में बात करेंगे । इनका बाल विवाह शारदा मणि से हुआ था लेकिन इनके मन में स्त्री को लेकर केवल एक माता भक्ति का ही भाव था ।



इनके मन में सांसारिक जीवन के प्रति कोई उत्साह नहीं था इसीलिए ही 17 वर्ष की उम्र में इन्होंने घर छोड़कर स्वयं को मां काली के चरणों में सौंप दिया । ये दिन रात साधना में लीन रहते थे । इनकी भक्ति को देख सभी अचरज में रहते थे । इनका कहना था कि मां काली इनसे मिलने आती है । 



वे उन्हें अपने हाथों से भोजन कराती हैं । जब भी मां काली उनके पास से जाती वे तड़पने लगे और एक बच्चे की भांति अपनी मां की याद में रुदन करते । उनकी इसी भक्ति के कारण वे पूरे गांव में प्रसिद्ध थे । लोग दूर दूर से उनके दर्शन करने के लिए आते थे और वह स्वयं दिन रात मां काली की भक्ति में रहते थे ।


संत से परमहंस बनने तक की कहानी ।



रामकृष्ण जी के परमहंस उपाधि प्राप्त करने के पीछे कई कहानियां हैं । परमहंस एक उपाधि है ये उन्हीं को मिलती है जिनमें अपनी इंद्रियों को वेश में करने की शक्ति हो जिनमें असीम ज्ञान हो और यही उपाधि राम किशन जी को प्राप्त हुई और वह राम कृष्ण परमहंस कहलाए । राम कृष्ण एक प्रचंड काली भक्त थे जो मां काली से एक पुत्र की भांति जुड़े हुए थे जिनसे उन्हें अलग कर पाना नामुमकिन था



जब रामकृष्ण माता काली के ध्यान में जाते और उनके संपर्क में रहते तो वे नाचने लगते गाने लगते और झूम झूमकर अपने उत्साह को दिखाते लेकिन जैसे ही संपर्क टूटता वो एक बच्चे की तरह विलाप करने लगते और धरती पर लोट पोट करने लगते । 

उनकी इस भक्ति के चर्चे सभी जगह थे उनके बारे में सुनकर सब तोता राम जो कि एक महान इंसान थे वो रामकृष्ण जी से मिलने आए और उन्होंने स्वयं रामकृष्ण जी को काली भक्ति में लीन देखा 





तोताराम जी ने राम किशन जी को बहुत समझाया कि उनमें असीम शक्तियां हैं जो तब ही जागृत हो सकती हैं जब वे अपने आप पर नियंत्रण रखें 

अपनी इंद्रियों पर अपना नियंत्रण रखें लेकिन राम किशन जी अपनी काली मां के प्रति अपने प्रेम को नियंत्रित करने में असमर्थ थे तो राम जी उन्हें कई तरह से मनाते हैं लेकिन वे एक सुनते तब तोताराम जी ने राम किशन जी से कहा कि अब जब भी तुम मां काली के संपर्क में आओ तुम एक तलवार से उनके टुकड़े कर देना ।



तब रामकृष्ण जी ने पूछा तलवार कैसे मिलेगी तब तोताराम जी ने कहा अगर तुम अपनी साधना से मां काली को बना सकते हो उनसे बात कर सकते हो उन्हें भोजन खिला सकते हो तब तुम तलवार भी बना सकते हो ।

 अगली बार तुम्हें यही करना होगा । अगली बार जब राम किशन जी ने महाकाली से संपर्क किया तब वह ये नहीं कर पाए और वह पुनः अपने प्रेम में लीन हो गए ।



 जब वे साधना से बाहर आए तब तोताराम जी ने उनसे कहा कि तुमने ही क्यों नहीं किया तब फिर से उन्होंने कहा कि अगली बार जब तुम साधना में जाओगे तब मैं तुम्हारे शरीर पर गहरा आघात करूंगा और उस वक्त से तुम तलवार बनाकर मां काली पर वार करना ।



अगली बार जब रामकृष्ण जी साधना में लीन हुए तब तोताराम जी ने रामकृष्ण जी के मस्तक पर गहरा आघात किया जिससे उन्होंने तलवार बनाई और मां काली पर वार किया । इस तरह संत तोताराम जी ने रामकिशन जी को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करना सिखाया

रामकृष्ण जी ने कई सिद्धियों को प्राप्त किया अपनी इंद्रियों को अपने वश में किया और एक महान विचारक एवं उपदेशक के रूप में कई लोगों को प्रेरित किया । उन्होंने निराकार ईश्वर की उपासना पर जोर दिया ।




 मूर्ति पूजा को व्यर्थ बताया । उनके ज्ञान के प्रकाश के कारण ही उन्होंने नरेन्द्र नाम के साधारण बालक जो कि आध्यात्म से बहुत दूर तर्क में विश्वास रखने वाला था को आध्यात्म का ज्ञान कराया । ईश्वर की शक्ति से मिलन करवाया और उसे नरेन्द्र से स्वामी विवेकानंद बनाया



राष्ट को एक ऐसा पुत्र दिया जिससे राष्ट्र को सीमा के परे सम्मान दिलाया । जिसने युवा वर्ग को जगाया और रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर देश जागरुकता का अभियान चलाया और अपने गुरु को गुरुभक्ति दी । रामकृष्ण परमहंस अनमोल वचन कुछ इस प्रकार से हैं


खराब आईने में जैसे सूर्य की छवि दिखाई नहीं पड़ती वैसे ही खराब मन में भगवान की मूर्ति नहीं बनती ।


धर्म सभी समान हैं वे सभी ईश्वर प्राप्ति का रास्ता दिखाते हैं अगर मार्ग में कोई दुविधा ना आए तब समझना कि राह गलत है 

जब तक देश में व्यक्ति भूखा और साया है तब तक देश का हर व्यक्ति गद्दार है विषयक ज्ञान मनुष्य के बुद्धि को सीमा में बांट देता है और उन्हें अभिमानी भी बना देता है । रामकृष्ण परमहंस के कई ऐसे अनमोल वचन है जो मनुष्य को जीवन कर सही मार्ग भी दिखाते हैं


Ramakrishna Paramahansa



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Thank You, Soo Much 

Comments

  1. भाई आपने सोर्स नही बताया कि ये सब कोनसी पुस्तक में लिखी है।

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