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Saturday, 23 November 2019

what is Geeta gayanti ? (गीता जयंती क्या है?)

what is Geeta Jayanti? (गीता जयंती क्या है?)




नमस्ते मित्रो, आज आपको हम गीता जयंती की एक अनोखी कहानी सुनाते हैं


आज से 70 80 साल पहले हमारा भारत देश जब आजाद नहीं हुआ था उस समय देश को आजाद करने के लिए कई स्वतंत्र सेनानियों ने अपने जान की बाजी लगा दी.

महात्मा गांधी सुभाषचंद्र बोस लालबहादुर शास्त्री सरदार वल्लभभाई पटेल कुछउनके नाम तो हम जानते हैं पर कुछ उनके नाम हम बिल्कुल नहीं जानते.

उस आम आदमी के नाम तो हम बिल्कुल नहीं जानते. जिन लोगों ने हमारे  भारत देश को आजाद करने के लिए बड़ी खुशी खुशी फांसी पर चढ़ जाना स्वीकार कर लिया है.



ऐसे कई लोग थे. जब जलियांवाला बाग में एक एक करके अंग्रेजों के सामने आते और बंदूक की

गोली खाकर भारत माता की जय भारत माता की जय भारत माता की जय. बच्चो मेरे पीछे बनोगे

भारत माता की. भारत माता की. भारतमाता की जय या वंदे मातरम कहते हुए हंसते हंसते प्राण त्याग देते थे.

कहते थे बच्चे अंग्रेजों को चला दो गोली सीना तानकर खड़े रहकर आंखों में आंखें डालकर इतनी निर्भीकता

अंग्रेजों में आज के पहले किन बच्चों में नहीं देखी शायद उनके देश के बच्चे हो सकता है कॉकरोच से डरते हैं.



हो सकता है कि उनके बच्चे दूर से चलती हुई छिपकली को देखकर डर जाते हों कि छिपकली है

क्यों डर मारे बेटा क्योंकि ऊपर छिपकली है और सोफा पर चढ़ जाते थे हो सकता है ऐसी निर्भीकता

अंग्रेजों ने आज के पहले कभी कहीं ना देखी हो. उनकी पुत्री.

जवाब देने लग जाती थी. बच्चों के इतने जोश और उत्साह को देशभक्ति को देखकर

और हो भी क्यों न बच्चों में वो जो भक्ति थी अपने देश को आजाद कराने की.

इतने छोटे छोटे मासूम बच्चों को देखकर अंग्रेजों की बंदूके नीचे हो जाती थी.


फिर भी वो इतने जोश से ललकारते थे कि अंग्रेजों को पर बस उन पर गोली चलानी पड़ती.

बच्चों आज आप और हम मुक्त भारत में सांस ले पाते हैं ये उन छोटे छोटे मासूम बच्चों

और हमारे बड़े बुजुर्ग माता पिता के समान उन लोगों की परिधानों का परिणाम है. हमारा उनको सलाम है.


हमारा उनको नमस्कार है. आपको पता है चुप उन बच्चों में इतनी निर्भीकता थी कि वे अंग्रेजों के सामने आते.

और कुछ बड़बड़ाते थे. कुछ बड़बड़ाते और. सीना चौड़ा करके खड़े रहते. खुशी खुशी गोली खाते और

भारत माता की जय करके प्राण त्याग देते. आखिर ऐसा जज्बाती कर. अंग्रेजों के मन में.
हलचल मच गई. एक अंग्रेज अधिकारी ने अपने भारतीय अफसर को बुलाया और. पूछा. हे भारतवासी.
तुम बच्चों को क्या पढ़ाता है. इतनी सी छोटी सी उम्र में बच्चा इतना बेखौफ कैसे हो सकता है. मजबूत प्राण बोलबाला.

वो अधिकारी. अंग्रेज अधिकारी को कहता है. सर ये ताकत कमाल है. अंग्रेज ने कहा कि.

हे शेट्टी वो समझ रहा था कि गीता शायद कोई लड़की हो. खुर्शीद. उसने थोड़ी सी ऊंची आवाज में कहा. डैडी. बेटा.

भारतीय अफसर पड़ी जोर से हंसने लग गया. सर. यह कोई पुरुष या स्त्री नहीं जिसे अरेस्ट किया जा सके.
यह तो हमारा राष्ट्रीय ग्रंथ है श्रीमद् भगवत गीता. ऑफिसर ने कहा इस 100 दिन.

आदर और गीता. कर्मचारी फिर जोर से हंसा. सर. जिसे आप अरेस्ट करने की बात कर रहे हैं ना.

वो आज नहीं पांच हजार साल पहले होके इस धरती से. ये तो एक किताब है. एक ग्रंथ है जिसे पढ़कर बच्चे निडर और निर्भिक हो गए हैं.

इन बच्चों के दिनों में. भी. खौफ. प्राण त्यागने की जो ताकत आ रही है.

वो बच्चे गीता पढ़कर हुई हैं. सर. उस भगवान कृष्ण. को आप अरेस्ट कैसे करोगे. किन हथकड़ियों में कैद करोगी.

अफसर. सिर खुजलाने लगा. सोच में पड़ गया. आखिर ऐसा तो तुम्हारी गीता में क्या लिखा है.

जिससे यहां का बच्चा बच्चा निर्भीक से. अंग्रेज बच्चों के सामने जाता है. और पूछता है.

हे बच्चा. तुम डाटा नहीं. तुम बेटा नहीं बंदूक से डेटा नहीं. वो बच्चे. आंखों में आंखें डालकर.

कहता है हम पर. गोली चला तुम व्यर्थ में. बातचीत करके समय को नष्ट न करो.
गोली चला मैं अपने देश को आजाद करना चाहता हूं क्या बच्चों की निर्भिकता थी.



क्या निर्धनता अँग्रेज सिर खुजलाने लग जाते थे. आखिर उसने पूछा. उस अफसर से भारतीय अफसर से. कि. ऐसा तो गीता में क्या लिखा है.
भारतीय ने कहा सर. जब आप पढ़ोगे तभी तो पता चलेगा न. पर मैं एक बात बता देता हूं. हमारे यहां रात को बच्चे सोते हैं

तब माताएं गीता का एक श्लोक लोरी में गाकर उन्हें सुनाती हैं. जिस कारण से यहां के बच्चे.

निडरता और तेजस्विता के धनी हैं. इंटेलिजेन्स. शार्प माइंड. हाई क्रासिंग पावर. कीन आप सर पर हैं.

अफसर ने पूछा. क्या है वह श्लोक. जिसके सुनने मात्र से ऐसी वीरता आ जाती है.

तब छोटे छोटे बच्चे एक साथ बोल पड़े. नयना मिशन जयंती श्रावणी नैना देहाती पापा कहा.

न चैनल ममता का न शोषण. हमें गीता के श्लोक पढते हैं. आप पूछ रहे थे न कि बचा लो तुम क्या बनाती है हम बढाती है. सर. ये बच्चे सही कहते हैं.



जब हमारे यहां रात को बच्चे सो जाते हैं तब माताएं सिर पर हाथ फेरते हुए इस श्लोक का उच्चारण करती है.

अर्थात. हे पुत्र. तू ये शरीर नहीं है. तो आत्मा है और आत्मा किसी भी शस्त्र से काटी नहीं जाती. आत्मा को अग्नि चला नहीं सकती.

आत्मा को पहाड़ों से फेंको उसे कोई मार नहीं सकता. आत्मा को पानी में कोई डुबान ही सकता.

तुम अजर अमर आत्मा हो. यह मरने वाला शरीर तो नहीं है. शरीर अगर मर जाए पर आत्मा कभी नहीं मरती पुत्र.

आत्मा तो. शरीर बदलती है. जैसे हम. कपड़े बदलते हैं. पुत्र अपने देश के प्रति भक्ति से. कभी भी चूकना मत देखना मत हारना मत पत्र.

मेरी कोख और मेरे दूत की सदैव लाज रखना. अपने कर्तव्य का पालन करते हुए तेरे प्राण भी चले जाएं. तू अमर हो जाएगा.

कीर्तिमान हो जाएगा यशस्वी हो जाएगा सर हमारे यहां माताएं भगवद् गीता का यह निर्भय नाद सुनाकर बच्चों को सुनाती हैं.

और उनकी परवरिश इसी प्रकार होती. यही गीता का ज्ञान इन बच्चों के स्वर मित्तल शक्ति ज्वाला की तरह आपके पसीने छुड़ा रहा है सर.


बच्चों. हम अगर अपनी ओर गौर करें तो क्या इतनी निडरता इतनी निर्भीकता इतना इंटेलिजेंस इतना शार्प माइंड आज हमारे पास है.

हम भयभीत हो गए हैं. उन्हीं अंग्रेजों के बच्चों की तरह जो छिपकलियों से डर जाते जो कॉकरोच से डर जाते. आप उस भारत माता की संतान हो बच्चों.

जिस. भारत का नाम. उस. भरत से पड़ा जो पाँच वर्ष का था. और शेर के बच्चे के दाँत गिनता था. मां.

ढूंढ़ते ढूंढ़ते बच्ची थक गई. बेटा भरत. और बेटा भरत कहां हो बेटा. मां बुला रही है. बेटा भरत. कहां हो.

जंगल से आवाज आती है मां मैं यहां हूं. मां जाकर देखती हैं उनको शेर का छोटा सा बच्चा. भरत उसका जबड़ा

फाड़कर दाँत गिन रहे खुद के भी गिन रहे हैं और उस शेर के बच्चे को भी गेंडा मिल जाएगा.



पेले के भी एक दांत मिला दुशाला दांत तुझे विदूषक नादान मिला तीर चलाना तुझे मितेश ला दांत पालना मुझे.

पहरेदार तुझे अपन दोनों दोनों देश निकाल लेते हैं. क्या निर्भिक बच्चे थे. हमारे. उसी निर्भीक और निडर

तेजस्वी बालक भरत के नाम से हमारे देश का नाम भारत पड़ा. आज आप देखिए बच्चों केवल 70 80 साल ही

बीते होंगे शायद हम इतने कमजोर हो गए. जब से हम अपनी संस्कृति को भूले हैं जब से वेस्टर्न कल्चर को हमने फॉलो किया है.

तबसे हम डरपोक हो गए. छिपकली कॉकरोच और मेंढकों से डरने लगे क्योंकि हमारा प्राण बल कमजोर हो गया. गीता पढ़ कर.

अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले उन बच्चों की ताकत को देखो और आप भी ऐसे ही निर्भीक बने जैसे आपके पूर्वकाल

में आप जैसे ही छोटे छोटे बच्चे निडर और निर्भीक बन कर अंग्रेजों के पसीने छुड़ा देते थे. गीता के श्लोकों को

पढ़ने से स्मरणशक्ति बढ़ती है. बार बार. रिविजन नहीं करना पड़ता. लर्निंग पावर बढ़ती है. भी. मेरे पीछे पीछे श्लोक का

उच्चारण करें शस्त्र पानी ही नहीं है न ही न शोशा मारता है बच्चों.



हर रोज गीता जी का पाठ कर अपने जीवन को उन्नत बनाएं. गीता में वो सब कुछ है.

जो आप हासिल करना चाहते हैं. इसलिए बच्चों वीर बनो निडर बनो निर्भीक बनो. अच्छे बुद्धिमान बनो. तेजस्वी बनो साहसी बनो.

ये. सबकुछ. गीता जी के साथ. सब कुछ आपको. गीता से हासिल हो सकता है. इसलिए. गीता जी पढ़ें श्लोकों का उच्चारण करें.

और अपने जीवन को महान भारत माता की. भारत. माता की भारत माता की. श्रीमद भगवत गीता की श्रीमद् भगवत गीता की श्रीमद् भगवद् गीता की।

what is Geeta gayanti ? (गीता जयंती क्या है?)

Geeta Jayanti 2019 is on 8th December Sunday (गीता जयंती 8 दिसंबर 2019 रविवार को है)


what is geeta gayanti ? (गीता जयंती क्या है?)


Rituals of the Festival (महोत्सव के अनुष्ठान)


  • इस विशेष दिन पर गीता के एक स्पष्टीकरण के माध्यम से आज के युवाओं को धर्म के मूल्य सिखाने के लिए कई आयोजित समारोह आयोजित किए गए हैं।

  • भगवान कृष्ण को समर्पित मंदिर इस दिन को बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं, जिसमें विशेष पूजा के साथ पूजा करना भी शामिल है।

  • देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों से भक्त इस दिन कुरुक्षेत्र की यात्रा करना पसंद करते हैं और पवित्र तालाबों में पवित्र स्नान करते हैं।

  • पवित्र स्नान के अलावा, भगवान कृष्ण की पूजा अंत में आरती के साथ घर पर की जा सकती है।

  • चूंकि यह एकादशी पर मनाया जाता है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इस दिन उपवास करने वाले भक्त चावल, गेहूं और जौ जैसे अनाज का सेवन नहीं करते हैं।




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